लेखनी कहानी -13-Jun-2024
प्रतिशोध की आग (कहानी) प्रतियोगिता हेतु
विमला सुबह-सुबह पूरे घर की सफ़ाई करने, पर्दे बदलने, अच्छा पकवान बनाने, घर के पर्दे बदलने आदि कामों में लगी हुई थी उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कोई ऐसा व्यक्ति आने वाला है जिसका उसे काफ़ी दिनों से इंतज़ार था।
हाँ ऐसा ही तो व्यक्ति था, वह व्यक्ति था उसका बेटा जो 4 महीने से घर नहीं आया था विमला की आंँखें उसे देखने के लिए तरस गई थीं। आखिर तरसेंगी भी क्यों नहीं! उसके बेटे के अलावा उसकी दुनिया में और था ही आख़िरकार कौन! आखिरकार वह दिन भी आ गया जिस दिन सोहन अपनी मांँ के पास आने वाला था।लेकिन सोहन की गाड़ी का समय तो ख़त्म हो गया था और सोहन घर नहीं पहुंँचा था।
वह बड़बड़ाते हुए सोच रही थी ।पहुंँच गए होंगे उसके दोस्त, बस दोस्त- मित्र के आगे माँ कहांँ याद रहेगी यही तो फ़र्क है मांँ और बच्चे में उसकी जगह यदि मैं होती और मेरे मित्र मुझे लेने पहुंँचते तो मैं साफ़-साफ़ मना कर देती। देखो मैं इतने दिनों बाद आई हूंँ पहले मैं अपने बच्चे से मिलूँगी उसके बाद ही किसी दोस्त- मित्र से।
लेकिन बच्चों के लिए ऐसा थोड़ी है, बच्चों के लिए तो उनके मित्र ही सब कुछ हैं। तभी मोबाइल घनघना उठा और उसी के साथ उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था।वह यह सोचती हुई मोबाइल उठाई कि अब फो़न करके कहेगा मांँ दोस्तों के साथ हूंँ थोड़ा देर हो जाएगा तुम इंतज़ार मत करना।
पर फ़ोन उठाने पर जो आवाज़ उसके कानों में पड़ी उसे सुनते ही वह लड़खड़ा कर गिर पड़ी। तभी सामने खड़ी नलिनी(पड़ोसी की बच्ची)आकर उसे संँभालते हुए बोली क्या बात है आंटी किसका फ़ोन था?
विमला कुछ समय तक तो कुछ भी बोल पाने में सक्षम नहीं थी। उसके पश्चात् वह चिल्ला- चिल्लाकर रोते हुए कहने लगी, नहीं ऐसा नहीं हो सकता, ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता उसने आज आने का वायदा किया था वह अपना वायदा नहीं तोड़ सकता।
नलिनी विमला को झकझोरते हुए, लगभग उसे होश में लाते हैं उससे पूछने लगी आंटी कुछ बोलेंगी, क्या नहीं हो सकता? किसका फ़ोन था?
नलिनी ने चिल्लाते हुए कहा, किसी महेश का।वह कह रहा था मेरा बेटा दुनिया में नहीं रहा। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है! उसने तो मुझसे पक्का वायदा किया था आज जाने का।
नलिनी यह शोक संदेश जाकर अपने घर तथा आस- पड़ोस वालों को बता आई। सभी अगल-बगल के लोग घर पर आ गये फिर चार-पांँच घंटे बाद वो आया जिसका विमला को इंतज़ार था। लेकिन जिस रूप में आया उस रूप का इंतज़ार नहीं था।
आख़िरकार सोहन का अंतिम संस्कार, दसवाँ, तेरहवीं करके सब लोग अपनी सामान्य ज़िंदगी जीने लगे किंतु विमला की तो दुनिया ही अंँधेरी हो गई थी। अब उसकी ज़िंदगी में सिर्फ़ एक ऐसी काली लंबी रात थी जिसका कभी सवेरा ही नहीं हो रहा था। उसका मन बार-बार कह रहा था कि सोहन की मौत नैसर्गिक नहीं है।
अपने मन की बात को पुष्ट करने हेतु वह गंगा किनारे तपस्या करते एक औघड़ बाबा के पास गई। जिनके बारे में लोगों का मत था कि वह मृत आत्माओं से बात करके आपके किंही पांँच प्रश्नों का सही-सही उत्तर दिलवा सकते हैं।
विमला औघड़ बाबा के पास जाकर अपने बेटे के मौत का रहस्य पूछी।औघड़ बाबा आधे घंटे तक पूजा किये, तभी एक अजीब-सी आवाज़ वहांँ पर गूँजने लगी। दिये की लौ बहुत तेज़ जलने लगी। तभी औघड़ बाबा ने पूछा, तुम्हें किसी ने मारा है? हाँ किसने मारा है? श्याम नारायण ने वो कहांँ रहते हैं? मुंबई के रहने वाले हैं लेकिन मेरे ही ऑफिस में काम करते हैं और ऑफिस के बगल में सहारनपुर कॉलोनी में रहते हैं। उन्होंने ने तुम्हें कैसे मारा? ट्रेन पकड़ने से पूर्व मैं उनके साथ चाय पीने गया। जिसमें उन्होंने ज़हर मिला दिया।चाय पीते ही मेरा सर चक्कर खाने लगा। मैं वापस अपने घर जाना चाहता था लेकिन रास्ते में हीं गिर कर मेरी मौत हो गई। तुम्हारे मौत के बारे में सबको पता कैसे चला? उन्होंने ही जाकर सभी को बताया की पता नहीं मुझे क्या हो गया है मैं रास्ते पर गिरा पड़ा हूंँ। पाचवें प्रश्न का उत्तर देते ही वह अजीबो-गरीब आवाज़ शांत हो गई। दिया भी सामान्य गति से जलने लगी। अब अपने बेटे के मौत का रहस्य से जानने के पश्चात विमला के मन की बेचैनी एक तरफ जहां शांत हो गई वहीं दूसरी तरफ़ वह प्रतिशोध की आग में जलने लगी ।
अपनी आग को ठंडा करने के उद्देश्य से विमला सोहन के ऑफिस में नौकरी करने लगी। अभी उसे ज्वाइन किए हुए 15 ही दिन हुए थे तभी एक दिन जब वह सुबह-सुबह ऑफिस पहुंँची तो उसके पश्चात दो और कर्मचारी पहुंँचे और वो विमला के सामने वाली कुर्सी पर बैठकर उसे गंदे-गंदे इशारे करने लगे। जिसे देखकर विमला सिहर सी गई। वह जो बदला लेने के लिए शेरनी की भांँति उस ऑफिस में गई थी विपरीत परिस्थिति के आने पर तत्काल ही मेमना बन गई थी,वह डरकर कांँपने लगी। विमला को इस प्रकार डरकर काँपते हुए देखकर वो दोनों जाकर उसके अगर बगल में बैठकर उसे गंदे तरह से छूने लगे। विमला वहांँ से भागने की कोशिश करने लगी लेकिन वो दोनों उसे एनाकोंडा की तरह बाहों के फंदे में जकड़ते ही जा रहे थे। तभी किसी तीसरे व्यक्ति ने दस्तक दिया। उसने जब विमला को इस प्रकार उनकी बाहों में देखा तब उसने पास पड़ा डंडा उठाकर दोनों को दे मारा।डंडे के पड़ते ही दोनों उस तीसरे व्यक्ति पर अधमरे सांँप की भाँति टूट पड़े। आधे घंटे की लड़ाई के पश्चात ऑफिस के अन्य कर्मचारियों के आने पर जो निर्णय लिया गया वह दिल दहला देने वाला था। सभी के आने पर वो दोनों व्यक्ति उस तीसरे व्यक्ति को ही गुनहगार साबित कर दिए कि वह विमला देवी के साथ छेड़खानी कर रहा था और ये दोनों उन्हें बचा रहे थे। परिणाम स्वरुप तीसरे व्यक्ति को नौकरी से निकाल दिया गया किंतु इस लड़ाई- झगड़े और अंधे न्याय के दौरान विमला को इस बात जानकारी हो गई कि उन्हें उन दरिंदों से बचाने वाला व्यक्ति ही श्याम नारायण है और श्याम नारायण को भी इस बात की जानकारी हो गई कि वह सोहन की मांँ है।
यह सब देख- सुनकर वह एक सप्ताह के पश्चात ही नौकरी छोड़कर घर बैठ गई। उसके मन में बार-बार यही ख़्याल आता कि अगर श्याम नारायण नहीं रहा रहता तो वो दोनों मुझे भेड़िए की तरह नोच डालते।वह उस व्यक्ति की हत्या कैसे करे जिसने उसकी इज़्ज़त को बचाया। किंतु, दूसरी तरफ़ यह ध्यान आता कि इसने चाहे जितनी अच्छाई दिखाई हो लेकिन उसके पहले उसके जीवन में जो अंँधेरा छाया है वह अंँधेरा उसी का दिया हुआ है। अतः उसकी हत्या करने में कोई पाप नहीं है। विमला हर दिन सोचती आख़िर किस प्रकार वह श्याम नारायण की हत्या करे।
तभी एक दिन श्याम नारायण विमला के घर का पता पूछते हुए उसके घर पहुंँच गया और प्रणाम करते हुए बोला आप मुझे अपना बेटा समझ सकती हैं। आपको किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो आप मुझे बता सकती हैं। इतना कहकर वह चला गया। अब वह समय-समय पर फ़ल, सब्जियाँ लाकर विमला को दे जाता। एक तरफ़ श्याम नारायण से विमला जुड़ती जा रही थी तो दूसरी तरफ़ उसके अंदर जो प्रतिशोध की ज्वाला जल रही थी वह हर बार मिलने पर और भी तेज़ धधक उठती।
एक दिन सुबह-सुबह श्याम नारायण को फ़ोन की और बोली आज मेरा व्रत है मुझे पूजा का सामान चाहिए और उसने पूजा के समान का लिस्ट बनाकर श्याम नारायण को भेज दिया। आज उसने पूरा मन बना लिया था कि वह श्याम नारायण का काम तमाम कर देगी।
जैसे ही घंटी बजी वह हाथ में रिवाल्वर लेकर अपने आप को संँभालते हुए दरवाज़ा खोली और रिवाल्वर श्याम नारायण के सीने पर लगा दी। श्याम नारायण ने बड़े ही अदब से विमला से कहा आप को जो भी करना है ऐसे करिए कि आपके ऊपर कोई आंँच न आए।
फिर वह बड़े ही शांतिपूर्वक सोफे पर बैठकर विमला से बोला।अब बताइए आप मुझे मारना चाहती हैं न अपने घर में आप मुझे मत मारिए चलिए हम दोनों बाहर दूर जंगल में चलते हैं वहांँ पर आप मुझे मारकर वापस आ जाइएगा ताकि आपके ऊपर किसी को शक न हो। यहांँ पर आप मारेंगी तो लोगों को आप पर शक नहीं यकीन हो जाएगा और पुलिस आपको पकड़ कर ले जा सकती है।
श्याम नारायण के इस प्रकार की बातों को सुनकर विमला के हाथ से रिवाल्वर गिर गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे।दिल की सुने या दिमाग की। तभी श्याम नारायण ने विमला को उसके बेटे के बारे में बताया, माँ जी आपके बेटे के मरने का मुझे बहुत दुख है। लेकिन आपका बेटा एक बहुत ही बुरा इंसान था। वह उन दोनों व्यक्तियों के साथ जो आपके साथ घिनौनी हरकतें कर रहे थे ग़रीब लड़कियों को नौकरी दिलाने के बहाने अपने घर पर बुलाता था और घर पर बुलाने के पश्चात उसका तीनो मिलकर रेप करके उसका वीडियो बना लेते अब उसे वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसे हर दिन अपने घर बुलाकर उसका रेप करते उनसे पैसे मांँगते थे।जब उनका मन भर जाता या जब लड़की पैसे देने में अपनी असमर्थता जताने लगती तब उसे धक्के मार कर निकाल देते थे। यह उनका शौक बन गया था। मैं इस बात को सालों से जान रहा था लेकिन उस दिन मेरे अंदर आत्मा चित्कार उठी मुझे लगा यदि ये तीनों ज़िंदा रहे तो कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करेंगे। आख़िर मैं भी एक बेटी का बाप हूंँ उस दिन मेरे अंदर का बाप जाग उठा इसलिए मैं उस दिन अपने आप को रोक नहीं पाया और सोहन को चाय में ज़हर मिलाकर पिला दिया। और अब मेरा अगला शिकार ये दोनों हैं।
विमला श्याम नारायण की बातों को सुनकर भौचक्की सी रह गई और उसने कहा, तुम्हारे पास इसका सबूत क्या है? तभी श्याम नारायण ने कहा, मांँ जी मैं एक दो नहीं दसों लड़कियों को बुला दूंँगा जो अपने मुँह से आपके बेटे के दरिंदगी की कहानी सुनाएंँगी।
विमला को श्याम नारायण की बातों पर विश्वास हो गया और वह श्याम नारायण को अपने बेटे की तरह गले से लगा ली और बोली बेटा, मुझे उन लड़कियों से मिलना है। मैं उन लड़कियों की जो कुछ मदद कर सकती हूंँ करके अपने बेटे के द्वारा किए गए गुनाह को कुछ कम करना चाहती हूंँ। मैं उनके पैरों में गिरकर उनसे माफी मांँगना चाहती हूँ।
इस तरह प्रतिशोध की आग में जलती हुई विमला अपने बेटे के काले करतूतों की सच्चाई जानते ही बिल्कुल ठंडी, ठंडी और बर्फ के समान ठंडी पड़ गई।
साधना शाही, वाराणसी, उत्तर प्रदेश